Bihar Political Crisis News Live: नीतीश-मोदी प्रकरण, बिहार में नौंवी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार, जानिए इस खेल के बारे में

Bihar Politics LIVE Updates: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद 17 महीने पुराने महागठबंधन सरकार अब टूट गया है, राज्यपाल को इस्तीफ़ा देने के बाद नीतीश कुमार ने मीडिया से बात और अपने इस्तीफ़े की वजह भी बताई, इसके बाद NDA विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया । इसके बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

इसी उथल-पुथल के बीच पत्रकार श्याम मीरा सिंह के एक X पोस्ट खूब वाइरल हो रही है जिसको उन्होंने मार्च 2022 में लिखा था जब नीतीश कुमार भाजपा से पलटी मारकर RJD के साथ मिलकर सरकार बनाया था और एक बार फिर RJD से पलटी मारकर भाजपा के सरकार बनाई तब श्याम मीरा सिंह ने वही लिखा पोस्ट अब X पर पोस्ट किया जो खूब वाइरल हो रही है। जो नीचे है

नीचे दो तसवीरें लगा रहा हूँ। एक साल 2009 की है, एक 2022 की। पहली तस्वीर लखनऊ में योगी आदित्यनाथ के शपथ समारोह की है। मोदी के आगे 145 डिग्री तक झुक आए शख़्स का नाम है नीतीश कुमार। 

जून, 2013 का वक्त था। नरेंद्र मोदी को साल 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। तब इन्हीं नीतीश ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद नीतीश ने खुद को धार्मिक तटस्थता के पैरोकार के रूप में पेश किया। इधर, बिहार बीजेपी ने महीनों तैयारी कर मोदी की पहली रैली करवाई। नाम थाहुंकार रैली। बड़ेबड़े पत्रकार दिल्ली से बिहार निर्यात किए गए। पूरे पटना को मोदी के पोस्टरों से पाट दिया गया। इस रैली में मोदी ने नीतीश कोमौकापरस्तऔरबगुलाभगततक कहा। 

साल 2014 के चुनावों पर लिखी अपनी एक किताब में राजदीप सरदेसाई बताते हैंकुछ साल पहले एक रात्रि भोज पर मैंने नीतीश से पूछा था कि मोदी के बारे में ऐसा क्या था कि वह इतना आहत हो गए। इस पर नीतीश का जवाब था, “यह विचारधारा की लड़ाई हैयह देश सेक्युलर है और सेक्युलर रहेगाकुछ लोगों को यह पता होना चाहिए।

हालाँकि नीतीश सेक्युलरिज्म का फ़र्ज़ी यूज करते रहे हैं, गुजरात दंगों के बाद बीजेपी गठबंधन में मंत्री रहे पासवान ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया था। लेकिन तब रेलवे मंत्री रहे नीतीश ने कुछ नहीं किया। मोदी के विरोध में उन्होंने चूँ तक नहीं की। बल्कि उन्होंने गुजरात जाकर एक कार्यक्रम में मंच भी साझा किया। लेकिन मोदी के प्रति उनके समीकरणों में आगे बदलाव आया। 

साल 2005 में बिहार चुनाव हुए। मुसलिम वोट लालू से शिफ़्ट होकर नीतीश की तरफ़ चले गए। इससे नीतीश की पूरे बहुमत के साथ सरकार आई। नीतीश समझ गए कि अब लंबी राजनीति के लिए मुसलिम वोट चाहिए। इसलिए उन्होंने बीजेपी गठबंधन में रहते हुए भी मोदी से दूरी बनानी शुरू कर दी। 

इस बीच नीतीश बीजेपी से संबंध बनाए रखने के लिए जेटली और सुशील मोदी से काम चलाते रहे। साल 2009 का समय था। बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे आडवाणी। बीजेपी ने शक्ति प्रदर्शन के लिए लुधियाना में संयुक्त रैली रखी और नीतीश को बुलाया। 

नीतीश ने आने में अनिच्छा ज़ाहिर की क्योंकि उन्हें मालूम था कि वहाँ मोदी आएँगे। नीतीश नहीं चाहते थे कि वे मोदी के साथ मंच साझा करें। क्योंकि उन्हें खुद को सेक्युलरिज्म के एक शीर्ष पैरोकार के रूप में दिखाना था। तब मोदी बीजेपी में कोई बड़ी ताक़त भी नहीं थे इसलिए उन्हें इग्नोर करने में नीतीश का कोई नुक़सान भी नहीं था।

नीतीश की अनिच्छा देख जेटली ने उन्हें कहा कि ये आडवाणी का कार्यक्रम है इसलिए उनका होना ज़रूरी है। नीतीश के आडवाणी से अच्छे सम्बन्ध थे। इसलिए वहां जाने के लिए राज़ी हो गए। लेकिन मोदी बड़े राजनीतिक खिलाड़ी हैं। नीतीश के मंच पर पहुंचते ही वे अभिवादन करने के लिए पहुँच गए और नीतीश का हाथ पकड़ लिया। 

ये ऐसा सीन था जिसे टीवी और अख़बारों की हेडलाइनों ने लपक लिया। नीतीश इसपर लालपीले हो गए। उन्होंने मोदी के हाथ पकड़ने की घटना को खुद के साथ विश्वासघात कहा। राजदीप की किताब के अनुसार नीतीश ने बाद में जेटली से कहा, ‘आपने अपना वायदा नहीं निभाया।

साल 2010 में पटना में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थी। पूरे पटना में मोदी के बड़ेबडे़ पोस्टर लगाए गए। जिसमें कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मोदी के योगदान का आभार व्यक्त किया गया था। दरअसल गुजरात सरकार ने बाढ़ पीडितों के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे।

नीतीश ने पटना में आए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को अपने यहां डिनर पर बुलाया हुआ था। नीतीश ने जब समाचार पत्रों में मोदी के दान वाले विज्ञापन देखे तो ग़ुस्सा हो गए। उन्होंने डिनर कार्यक्रम तक रद्द कर दिया और बाद में दान के पैसे लेने से भी इंकार कर दिया। इस बात पर मोदी भी गुस्सा हो गए। 

राजदीप की किताब के अनुसार मोदी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी से कहा, ‘आप नीतीश को मेरे साथ ऐसा आचरण करने की अनुमति कैसे दे रहे हैं?’ नीतीश की आत्मकथा लिखने वाले संकर्षण के अनुसार, ‘यह वह दिन था जब नीतीशमोदी की लड़ाई ने व्यक्तिगत स्तर पर एक भद्दी शक्ल ले ली।

राजदीप सरदेसाई की किताब के अनुसार– 2010 की घटना पर नीतीश ने अपने एक सहयोगी से कहा, ‘हम उनके (मोदीबीजेपी) बगैर भी चल सकते हैं।’ 2010 के बाद बीजेपी में मोदी का क़द बढ़ने लगा। 2013 तक वे बीजेपी के निर्विवादित शीर्ष नेता बन गए। 2013 में नीतीश ने भी बीजेपी गठबंधन से रिश्ता तोड़ लिया।

एक वक्त था, जब सार्वजनिक मंच पर मोदी के गले मिलने पर नीतीश लालपीले हो गए और एक वक्त अब है, जब वो ही तीरकमान की तरह मोदी के पैरों में लटक रहे हैं। वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन आचरण उस राज्यपाल की तरह कर रहे हैं जिसका कार्यकाल प्रधानमंत्री की दया पर आश्रित होता है। समयसमय की बात है।

30 thoughts on “Bihar Political Crisis News Live: नीतीश-मोदी प्रकरण, बिहार में नौंवी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार, जानिए इस खेल के बारे में”

  1. I do trust all the ideas you’ve presented in your post. They are really convincing and will definitely work. Nonetheless, the posts are too short for newbies. May just you please lengthen them a bit from next time? Thank you for the post.

    Reply

Leave a Comment